दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्‌डे से,

लॉकडाउन के बीच आज पूरे 62 दिनों के बाद डोमेस्टिक फ्लाइट शुरू हुईं। हम सवेरे साढ़े चार बजे राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुंचे। सवेरे 7 बजे की उड़ान के लिए कम से कम दो घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी था।

सोशल डिस्टेंसिंग कायम रहे, इसलिए एयरपोर्ट पर बीच की कुर्सी पर न बैठने के निर्देश लिखे हुए हैं।

हम दो लोग थे और दो अलग-अलग रूट्स के टिकट लिए थे। एक रूट था, दिल्ली से मुंबई जिसके बाद दोपहर में कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर मुंबई से जयपुर जाना था और अगली सुबह फिर जयपुर से दिल्ली। वहीं दूसरे रूट पर दिल्ली से हैदराबाद और फिर शाम को कनेक्टिंग फ्लाइट लेकर हैदराबाद से इंदौर और अगले दिन इंदौर से दिल्ली पहुंचना था।

किस एयरलाइन के पैसेंजर को कहां से एंट्री मिलेगी, इसके लिए भी बाकायदा बोर्ड लगाए गए।

एयरपोर्ट पहुंचे तो सब सामान्य था, हां हमारी हैदराबाद से इंदौर की फ्लाइट कैंसिल होने का मैसेज जरूरत रात 1 बजे मिला था। सबकुछ प्लान के मुताबिक चल रहा था लेकिन फिर दिल्ली से हमारी दोनों फ्लाइट्स रीशेड्यूल कर दी गईं। सुबह 7 बजे जिस फ्लाइट को निकलना था वह शाम 6 बजे जाएगी, ऐसा कहा गया। कारण पूछा तो बोले, लोड कम है।

फ्लाइट की जानकारियां लेते भास्कर के रिपोर्टर।

या तो टिकट ही बुक नहीं हुए या फिर लोग एयरपोर्ट तक नहीं पहुंचे। सुबह जब हमने कैब लेने की कोशिश की तो वो भी नहीं मिली। बमुश्किल एयरपोर्ट पहुंचे।

स्टॉल से जरूरत का सामान लेते लोग। यहां भी कोरोना से बचाव के लिए सैनिटाइजर इस्तेमाल करने के पोस्टर नजर आए।

एयरपोर्ट पर शुरुआती माहौल सहज और सामान्य दिखा, पीपीई, ग्लव्स, मास्क से मुस्तैद यात्री बाकायदा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बारी-बारी से एयरपोर्ट में प्रवेश करने के लिए लाइनों में लगे थे।

एंट्री के लिए अपनी बारी का इंतजार करते लोग। सोशल डिस्टेंसिंग भी दिखी।

लग रहा था जैसे पूरे माहौल पर कोरोना से जुड़ी ऐहतियात हावी हैं। सुबह-सुबह एयरपोर्ट पर जिस दुकान पर सबसे ज्यादा खरीदार दिखे वह मास्क, शील्ड और पीपीई किट बेचने वाला काउंटर था। जो यात्री एयरपोर्ट पर थे उनमें ज्यादातर स्टूडेंट्स, बुजुर्ग और छोटे बच्चे थे।

सफाई को लेकर मुस्तैद एयरपोर्ट के कर्मचारी।

दूसरे यात्रियों से बातचीत के बाद यह मालूम होने लगा कि महाराष्ट्र, झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत गुजरात की उड़ानें आज रवाना नहीं हो रही हैं। इन्हीं सबसे से जूझते यात्री अपनी फ्लाइटों की रीशेड्यूलिंग के लिए पूछताछ काउंटरों पर जमा होने लगे।

फ्लाइट के लिए कहां से प्रवेश मिलेगा, सुरक्षा गार्ड भी इसकी जानकारी देते नजर आए।

यात्री हताश और निराश हैं, दूर-दूर से सवेरे की शुरुआती उड़ानों के लिए तैयारी कर पहुंचे पैसेंजरों की मदद के नाम पर एयरलाइंस बस इतना कर रही हैं कि उन्हें डिले सर्टिफिकेट पकड़ा रही है जिनके आधार पर वे अपना पैसा वापस ले सकते हैं।

दो महीने से ज्यादा वक्त के बाद घरेलू उड़ानें शुरू हुईं, लेकिन भीड़ नजर नहीं आई।

लोग अपना सा मुंह लेकर लौटने लगे हैं, एयरपोर्ट परिसर में ही ऊंघते, ऊबते और हलकान-परेशान पैसेंजरों को देखा जा सकता है।



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सोमवार अल सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनी फ्लाइट का शेड्यूल देखते लोग। 62 दिन बाद उड़ानें शुरू होने के बावजूद भी एयरपोर्ट पर भीड़ नहीं दिखी।


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