काेराेनावायरस जबसे खतरा बना है, लाेग घर के भीतर हर चीज काे ज्यादास्प्रे करकेऔरपाेंछने लगे हैं। कई लाेग सतह पर स्प्रे कर एक-दाे बार पाेंछ देते हैं, लेकिन इससे किसी भी प्राेडक्ट काे काम करने का पर्याप्त वक्त नहीं मिलपाता। अलग-अलग स्प्रे क्लीनर और डिसइंफेक्टेंट पर 30 सेकंड से 4 मिनट तक समय लिखा हाेता है। ऐसे में सफाई का सही तरीका क्या है? बता रहे हैं इंफेक्शियस डिसीज साइंटिस्ट...

1. डिसइंफेक्टेंटकितनी देर तक सतह पर लगा रहने दें कि राेगाणु मर जाएं?

इंफेक्शियस डिसीजेस के इंस्ट्रक्टर डाॅ. एंड्रयू जानाेवस्की कहते हैं, ‘यह जितनी अधिक देर सतह पर लगा रहे, उतना बेहतर है। प्राॅडक्ट का अनुशंसित समय जानने के लिए उसका लेबल पढ़ें। यह 30 सेकंड से कुछ मिनट हाे सकता है। कुछ प्राेडक्ट सैनिटाइज करने का दावा करते हैं, यानी वे बैक्टीरिया के स्तर काे कम करते हैं। डिसइंफेक्टेंट के दावे का अर्थ है प्राेडक्ट बैक्टीरिया और वायरस दाेनाें काे खत्म या निष्क्रिय कर देता है।

2. डिसइंफेक्टेंट के प्रयोग से पहले सतह साफ करने को कहा जाता है, दाे बार सफाई जरूरी है?

यदि सतह पर भाेजन के अवशेष या मैल है ताे डिसइंफेक्टेंट के इस्तेमाल से पहले कूड़ा-करकट हटाना जरूरी है। गंदगी की परत रहेगी ताे बैक्टीरिया बचे रहेंगे।

3. चार मिनट तक पाेंछना जरूरी है?

माइक्राेबायाेलाॅजिस्ट हैली ऑलिवर बताती हैं पाेंछे (वाइप) काे लैब में टेस्ट किया जाता है ताे उसमें शुरुआती पाेंछे से सतह के सूखने तक का समय शामिल हाेता है। उद्देश्य सतह सूखने तक पाेंछना हाेता है। सतह जल्द सूखे ताे पहले भी राेक सकते हैं।

4. काेराेना से बचने के लिए बेहतर क्लीनर?

प्राेडक्ट के लेबल से यह जान सकते हैं कि काैन सा क्लीनर कैसे वायरस काे मारता है। काेरानावायरस चूंकि नया है इसलिए इससे जुड़े प्राेडक्ट आने में समय लग सकता है। तब तक अन्य वायरस खत्म करने वाले प्राेडक्ट इस्तेमाल कर सकते हैं। इंफेक्शियस डिसीज विशेषज्ञ डाॅ. डेनियल कुरिट्ज्केस कहते हैं ये अनुशंसाएं व्यापक हैं, जाे काेराेना से दुष्कर स्टैफ और स्ट्रेप जैसे बैक्टीरिया काे मारने में लगने वाले समय पर आधारित हैं।




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