पाकिस्तान में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल ब्लडप्लाज्मा पैसे कमाने का बड़ा जरिया बनता जा रहा है। यहां ठीक हुए कोरोना मरीज अपना एक बोतल प्लाज्मा 95 हजार रुपए तक में बेच रहे हैं। इस्लामाबाद के मोहम्मद साजिद ने कहा कि उन्होंने कोरोना पीड़ित अपने बेटे के इलाज के लिए बहुत ज्यादाकीमत में ठीक हुए मरीज का प्लाज्मा खरीदा। उनके पास और कोई विकल्प नहीं था।

इस्लामाबाद में एयरफोर्स हॉस्पिटल की मेडिकल अधिकारी डॉ. सोबिया अली ने कहा कि प्लाज्मा दान करना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय सुनिश्चित करे कि इसमें कालाबाजारी न हो। प्लाज्मा बेचने वाले लोगों और ब्लड बैंक पर निगरानी रखी जानी चाहिए। हम कोरोना से युद्ध के दौर से गुजर रहे हैं। वे लोग भाग्यशाली हैं जो इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं।

एक नागरिक सारा भुट्‌टा ने ट्वीट किया कि लोग पैसों के लिए अपना प्लाज्मा बेच रहे हैं। इंसानियत मर गई है। हालांकि, लाहौर के व्यवसायी शोएब अहमद कहते हैं कि प्लाज्मा बेचना गलत नहीं है।

लॉकडाउन पूरी तरह से फेल हो गया

पाकिस्तान में लोगों ने कोरोना पर शुरू से गंभीरता से ध्यान नहीं दिया था। अब यह यहां बेकाबू हो गया है। सरकार ने भी लॉकडाउन के जरिए रोकथाम में रुचि नहीं दिखाई। पाकिस्तान में मई में लॉकडाउन लगाया गया था, जो सफल साबित नहीं हुआ। विशेषज्ञों ने प्रधानमंत्री इमरान खान को वैसा ही लॉकडाउन करने की सलाह दी थी, जैसा भारत में लगाया गया। डब्ल्यूएचओ ने भी पूर्ण लॉकडाउन की सलाह दी थी। इमरान ने सलाह नहीं मानी।

पीएम इमरान खान खुद भ्रमित

इमरान तो यह भी कह चुके हैं कि 90 फीसदी कोरोना के मामले सामान्य बुखार हैं। ये बिना इलाज के ठीक हो जाएंगे। इस पर इस्लामाबाद में इकरा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में सामाजिक विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर इश्फाक अहमद ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान भ्रमित हैं।

दूसरी ओर प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य मामलों के सलाहकार डॉ. जफर मिर्जा ने कहा कि सरकार को अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य दोनों में तालमेल रखते हुए कदम उठाने की सलाह दी गई है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार धार्मिक नेताओं के दबाव में कोरोना पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रही है।

इस्लामी धर्म गुरु ने बोला था- ये पापों का नतीजा है

पाकिस्तान के इस्लामी धर्मगुरु मौलाना तारिक जमील दावा कर चुके हैं कि कोरोना पापों पर खुदा के गुस्से का नतीजा है क्योंकि महिलाएं नाचती हैं और अभद्र कपड़े पहनती हैं। एक स्थानीय सर्वे में खुलासा हुआ है कि सिर्फ 3 फीसदी पाकिस्तानी मानते हैं कि कोरोनावायरस मौजूद है और इससे निपटने का तरीका स्पष्ट है। बाकी लोग इसे मुस्लिमों के खिलाफ साजिश मानते हैं।

एक लाख से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए

पाकिस्तान में कोरोना के अब तक 1 लाख 85 हजार 34 मरीज मिले हैं। जबकि इससे 3,695 मौतें हुई हैं। यहां के अस्पतालों में प्रति 10 हजार लोगों पर सिर्फ 6 बेड हैं। निजी अस्पतालों में डॉक्टरों को 15 हजार से 25 हजार और सरकारी अस्पतालों में 70 हजार से 78 हजार रुपए सैलरी मिलती है।



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कराची के अस्पताल में डॉक्टर संदिग्ध मरीज के स्वाब का सैपल ले रहे हैं। पाकिस्तान में रोज 20 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं।


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