सुप्रीम कोर्ट आज प्राइवेट कंपनियों की याचिकाओं पर फैसला सुनाएगा। गृह मंत्रालय ने कहा था कि कर्मचारियों को 54 दिन के लॉकडाउन पीरियड की पूरी सैलरी दी जाए। प्राइवेट कंपनियों ने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी।

26 मई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि एक हफ्ते में एफिडेविट के जरिए जवाब दें। सरकार ने 4 जून को कहा था जो कंपनियां सैलरी देने में दिक्कत होने की बात कर रही हैं उन्हें अपनी ऑडिटेड बैलेंस शीट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए जाने चाहिए।

कोर्ट ने कहा- सरकार मध्यस्थ बन सकती है
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम आर शाह की बेंच इस केस की सुनवाई कर रही है। बेंच ने 4 जून को फैसला रिजर्व रख लिया था। कोर्ट ने कहा था कि कर्मचारियों को बिना सैलरी दिए नहीं छोड़ना चाहिए। कंपनियों के पास पैसे नहीं हैं तो सरकार मध्यस्थ बन सकती है। कोर्ट ने ये भी कहा कि सैलरी का 50% पेमेंट भी किया जा सकता था।



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लॉकडाउन में प्रोडक्शन बंद रहने से कई कंपनियों को आर्थिक दिक्कतें हो रहीं। ये फोटो गुड़गांव के उद्योग विहार इंडस्ट्रियल एरिया के कर्मचारियों की है।


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