मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन में से दो भाजपा और कांग्रेस के खाते में जाना तय है। भाजपा ने पहली वरीयता ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरी सुमेर सिंह सौलंकी को दी है। वहीं कांग्रेस ने पहली वरीयता दिग्विजय सिंह तो दूसरी पर फूलसिंह बरैया को रखा है। कांग्रेस की दूसरी वरीयता पर होने के कारण फूलसिंह बरैया की हार तय मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अब बरैया को उपचुनाव में प्रत्याशी बना सकती है।

नतीजे तय होने के बाद भी दोनों राजनीतिक दल आखिरी समय तक निर्दलीय विधायकों को अपने पक्ष में करने ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। एक-एक वोट के लिए खींचतान मची हुई है। सपा-बसपा, निर्दलीय विधायकों को कांग्रेस के पाले से खींचकर अपने पक्ष में करना, कांग्रेस द्वारा जीतने वाले उम्मीदवार को निर्धारित से दो वोट ज्यादा दिलाने की रणनीति बनाना, यह बताता है कि दोनों दल राई बराबर जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं।

राज्यसभा के वरीयता से ही टूटी कांग्रेस

दरअसल, कांग्रेस सरकार के पतन की नींव ही राज्यसभा के टिकट बंटवारे से उपजे अपमान की टीस को कहा जा रहा है। उस दौरान राजनीतिक गलियारों में इस बात की खास चर्चा थी की ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा भेजा तो जा रहा था, लेकिन दूसरी वरीयता पर। और यही बात उन्हें अपमान जैसी लगी। प्रदेश कांग्रेस में महाराजा और राजा की लड़ाई जगजाहिर रही है। ऐसे में राजा पहले और महाराजा दूसरे पायदान पर कैसे रह सकते थे। पार्टी में अपनी उपेक्षा झेल रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया को ये बात रास नहीं आई और अंतत: उनकी यही नाराजगी कमलनाथ सारकार के पतन का कारण बना।

बरैया को उपचुनाव लड़ाए जाने की चर्चा

कांग्रेस की कोशिश है कि उसके प्रथम वरीयता के उम्मीदवार की जीत में कोई गफलत न हो जाए, इसलिए वह जीत के लिए आवश्यक 52 वोटों से दो ज्यादा वोट दिग्विजय को दिलाने के लिए जुट गई है। 54 विधायकों को बता दिया गया है कि उन्हें दिग्विजय को वोट देना है। दूसरे उम्मीदवार फूल सिंह बरैया को लेकर पिछले दो माह से जारी अफवाहों को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह जरूरी हो गया था कि वह दिग्विजय सिंह की जीत सुनिश्चित कराए। भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने बरैया को पहले वरीयता देने के लिए खूब राजनीतिक हवा दी। भाजपा ने हवा देते हुए यह दबाव बनाने की कोशिश की थी कि यदि कांग्रेस अनुसूचित जाति की इतनी शुभ चिंतक है तो वह बरैया को राज्यसभा भेजे। अब बरैया को उपचुनाव लड़ाए जाने की चर्चा चल पड़ी है।



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विधानसभा में विधायकों की संख्या को देखते हुए दो सीट भाजपा और एक पर कांग्रेस उम्मीदवार की जीत तय है।


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