ये है तीन जिलाें के 100 गांवाें काे जाेड़ने वाला झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझारिया गांव का पुल। पांच साल पहले नक्सलियाें ने 300 मीटर लंबे इस पुल के दाे स्पैन काे उड़ा दिया था। ग्रामीणाें ने टूटे पुल से सीढ़ी जाेड़ी और आना-जाना शुरू कर दिया। वह सीढ़ी से बाइक भी ले जाते हैं। नक्सली नहीं चाहते कि पुल बने। हजारीबाग, रामगढ़ और बाेकाराे जिला के टाटीझरिया, आंगो, चुरचू, विष्णुगढ़, झुमरा पहाड़, बेड़म, परतंगा, मंगरपट्टा, चोंचा, जुल्मी, चुड़को, कंदागढ़ा, आदि गांवाें काे जाेड़ने वाला पुल तीन करोड़ में बेडम नदी पर बनाया गया था।

यमुना में मछली पकड़ने पहुंचे मछुआरे

कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में लागू किए गए सख्त लॉकडाउन में दिल्ली की यमुना नदी बिल्कुल साफ हो गई थी। लेकिन अनलॉक-2 के दौरान कुछ ही दिनों में दोबारा दूषित हो गई। शनिवार को यमुना में केमिकल से बने झाग के ऊपर मछुआरे मछली पकड़े के लिए जाल फेंकते हुए नजर आए।

पटरी पर दौड़ती ट्रेन के आगे से बच्चे लगाते हैं छलांग

बिहार के सीवान जिले में अलग-अलग स्थानों पर नदियों पर बने रेल पुल से बच्चे नहाने के लिए जानलेवा छलांग लगा रहे हैं। आश्चर्य यह है कि जिस वक्त ये बच्चे इस घटना को अंजाम दे रहे होते हैं उस वक्त ट्रेन पटरी पर बड़ी तेजी से दौड़ती आ रही होती है। हैरत की बात यह है कि ये बच्चे ट्रेन के बिल्कुल नजदीक आ जाने का इंतजार करते हैं और फिर वो एक-एक कर नदी में छलांग लगा देते हैं। इस लापरवाही की वजह से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

सब कुछ निगलने को बेताब है गंडक

फोटो बिहार के गोपालगंज जिले के दुबौली की है। यहां गंडक नदी की तबाही से लगभग 100 गांव प्रभावित हैं। पीड़ित परिवार बच्चों व मवेशियों के साथ रेलवे ट्रैक और हाइवे पर रात गुजारने को विवश हैं। इसी बीच शनिवार को बाढ़ में घिरी नीलगायों का झुंड 8 किलोमीटर पानी में तैरकर स्थान की तलाश में दुबौली पहुंचा।

सेना ने हेलीकॉप्टर से पीड़ितों के लिए गिराए फूड पैकेट

बिहार के 10 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। इससे करीब 10 लाख लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे ज्यादा 3.30 लाख लोग दरभंगा में प्रभावित हैं। बाढ़ का प्रमुख कारण नदियों पर बने बांधों को टूट जाना रहा है। गंगा और सोन नदी को छोड़कर राज्य की लगभग सभी नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। खासकर गंडक, बागमती, अधवारा भारी उफान पर हैं। बाढ़ और बिजली गिरने से राज्य में अब तक 115 लोगों की मौत हो चुकी है।

पीपीई किट, मास्क और ग्लव्स खुले में न फेकें

रांची में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, प्रशासन, पुलिस के साथ स्वास्थ्य विभाग लगातार लापरवाही बरत रहा है। सदर अस्पताल में जहां-तहां कचरा फैला है। पूरा कैंपस संक्रमित हो चुका है। दूसरी ओर, अस्पताल परिसर में ही पीपीई किट, ग्लव्स, इंजेक्शन और पानी की बोतलें फेंक दी हैं। इससे कोई भी संक्रमित हो सकता है। आईसीएमआर ने सख्त आदेश दिया है कि पीपीई किट, मास्क और ग्लव्स को खुले में नहीं फेंकना है। प्रयोग करने के बाद इसे जमीन के 3 फीट नीचे गड्ढे में गाड़ देना है या जला दें।

कोरोना काल का सफल आंदोलन

महाराष्ट्र में सांगली के भोसे गांव के लोगों ने येलम्मा मंदिर के पास 400 साल पुराने बरगद के पेड़ को कटने से बचा लिया। 400 वर्ग मीटर में फैला पेड़ रत्नागिरी-सोलापुर स्टेट हाईवे के बीच में आ रहा था। पेड़ कटने वाला था, तभी 20 ग्रामीण पेड़ घेरकर खड़े हो गए। चिपको आंदोलन हुआ। ऑनलाइन पिटीशन में 14 हजार से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल गया। आखिरकार मंत्रालय को हाईवे का नक्शा बदलने का फैसला करना पड़ा।

हैदरनगर में गरीब की झोपड़ी पर आकाशीय बिजली

फोटो झारखंड के पलामू जिले के सजवन गांव की है। यहां स्थित सोन नदी के तट पर आसमानी बिजली (वज्रपात) से जितेंद्र साव की एक गाय की मौत हो गई, जबकि सोन नदी के तट पर ही स्थित सूर्य मंदिर के समीप पशुओं के लिए फूस से बनी 3-4 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं। ग्रामीणों ने आग बुझाने का प्रयास कर अन्य झोपड़ियों को जलने से बचा लिया।



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Naxalites blew the bridge in Chhattisgarh 5 years ago, since then 100 people of the village move using the ladder


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