नेपाल का विदेश मंत्रालय ने विदेशी राजनयिकों के लिए नियमों में बदलाव का फैसला किया। यानी प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ‘डिप्लोमैटिक कोड ऑफ कंडक्ट’ बदलने जा रही है। इसके तहत अब कोई भी फॉरेन डिप्लोमैट किसी भी नेता से सीधे मुलाकात नहीं कर सकेगा। इसके लिए दूसरे देशों की तरह एक तय प्रक्रिया या प्रॉपर डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल और चैनल होगा।

कुछ महीने से नेपाल में सियासी संकट चल रहा है। इस दौरान चीन की राजदूत ने सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के कई नेताओं के अलावा राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से तक सीधे मुलाकात की थी। इसको लेकर नेपाली मीडिया और यहां तक कि आम लोगों ने सवाल उठाए थे।

बदलाव की जरूरत क्यों
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल की फॉरेन मिनिस्ट्री चाहती है कि डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए। लिहाजा, नेपाल में भी वही नियम होने चाहिए जो दूसरे देशों में हैं। विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने माना है कि कोड ऑफ कंडक्ट में बदलाव किए जा रहे हैं। 2016 में कोड ऑफ कंडक्ट में बदलाव का प्रस्ताव तैयार हुआ था। बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

तैयारी भी शुरू
फॉरेन मिनिस्ट्री ने सात प्रांतों में अपने सात सेक्शन ऑफिसर भेजे हैं। इनकी तैनाती अब यही रहेगी। इन सेक्शन ऑफिसर की यह जिम्मेदारी होगी कि कोई भी फॉरेन डिप्लोमैट राज्य के किसी भी मंत्री या मुख्यमंत्री से प्रोटोकॉल तोड़कर मुलाकात न कर पाए। इस नियम के दायरे में सभी राजनीतिक दल और नेता आएंगे। कवायद का मकसद है कि फॉरेन डिप्लोमैट्स और मिशन नियमों का सख्ती से पालन करें।

चीनी राजदूत की हरकत
अप्रैल और जुलाई की शुरुआत में चीन की एम्बेसेडर हो यांगकी ने राष्ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से सीधे मुलाकात की। एनपीसीपी के कई नेताओं और प्रधानमंत्री ओली से भी उन्होंने प्रोटोकॉल के उलट मुलाकात की। इससे नेपाल में नाराजगी दिखी। भारत के एम्बेसेडर के बारे में भी यही कहा गया कि वे सीधे नेताओं से मुलाकात करते हैं। इस दौरान लद्दाख में चीन और भारत का तनाव चरम पर था। चीन की शह पर नेपाल ने भी भारत को आंखें दिखाने की कोशिश की थी।

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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के साथ चीन की एम्बेसेडर हो यांगकी। आरोप है कि यांग्की नेपाल के अंदरूनी मामलों और सियासत में दखल देती हैं। (फाइल)


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