(मुकेश कौशिक) हेट स्पीच को लेकर विवादों में घिरी फेसबुक के प्रतिनिधियों की बुधवार को संसदीय समिति के सामने पेशी हुई। वहां करीब 200 मिनट तक उनकी धुआंधार खिंचाई की गई। हेट स्पीच को लेकर भाजपा के पक्ष में वाल स्ट्रीट जनरल और टाइम मैगजीन में हुए खुलासे को लेकर कांग्रेस के सदस्यों ने फेसबुक को घेरा तो भाजपा के सदस्यों ने जो सवाल किए उनका लब्बोलुआब यह था कि मार्क जकरबर्ग की यह कंपनी कांग्रेस के साथ सांठ-गांठ से काम कर रही है।

30 सदस्यों की समिति की अध्यक्षता शशि थरुर के पास है जो सोशल मीडिया पर कांग्रेस की मुखर आवाज हैं। उन्हें खामोश करने के लिए समिति की बैठक में भाजपा के सांसद पूरी तैयारी से आए थे। उन्होंने फेसबुक के साथ कांग्रेस की नजदीकियों का पूरा इतिहास खंगाला हुआ था।

भाजपा के सदस्यों ने अपने सारे सवाल इन्हीं रिश्तों पर पूछे। फेसबुक के इंडिया प्रमुख अजीत माेहन से उन्होंने सीधा सवाल किया कि कश्मीर के बारे में वह क्या राय रखते हैं। उनके लेखों का हवाला देते हुए यह भी सवाल आया कि क्या वह मानते हैं कि कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार आतंक फैला रही है, जैसा कि उन्होंने अपने आलेखों में लिखा है।

ये थे दिलचस्प सवाल

  • जय श्रीराम कहना फेसबुक की पॉलिसी के हिसाब से सांप्रदायिक है?
  • आपके अफसरों से कांग्रेस नेता अहमद पटेल के क्या रिश्ते हैं।
  • फेसबुक अपने को भारत में इंटर मीडिएटरी क्यों कहती है। कैलीफोर्निया के कोर्ट में उसने खुद को एक पब्लिशर के तौर पर स्वीकार किया है
  • फेसबुक के फैक्ट चैकिंग बोर्ड में शामिल कोई पार्टनर क्या कांग्रेस के डाटा एनेलेटिक्स में काम कर चुका है।
  • राष्ट्रवादी विचारधारा से संबंधित कितने पोस्ट 2019 में फेसबुक ने डिलीट किए। क्या यह सही है कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े वे 700 पेज हटाए गए जिनकी कुल फालोविंग 26 ख से अधिक थी।
  • क्या यह सही है कि कांग्रेस और वामपंथी विचारधारा से जुड़े जो लेख हटाए गए। उनकी कुल फालोविंग 2 लाख थी।
  • कैम्ब्रिज एनेलेटिका कांग्रेस के साथ 2019 में मिलकर काम कर रही थी?
  • क्या फेसबुक ने 2019 के चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास किया था?
  • नरेंद्र मोदी के बयानों के बारे में फेसबुक ने कितने फैक्ट चेक किए। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बयानों को कितनी बार चैक किया गया।
  • क्या 21 वीं सदी की ईस्ट इंडिया कम्पनी फेसबुक है जो भारतीय कानूनों को नहीं मानती और बांटो एवं राज करो के रुल में यकीन करती है।


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संसदीय समिति की बैठक के बाद बाहर आते फेसबुक इंडिया के एमडी अजीत मोहन।


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