गया शहर में पान की दुकान। शाम के 6-7 बजे हैं। काम-धंधा निपटाने के बाद कई लोग मगही पान के अपने कल्ले दबाने की ख्वाहिश से दुकान पर पहुंचे हैं। दोपहर में ही प्रधानमंत्री और भाजपा के कई नेता शहर में थे। गांधी मैदान में। एनडीए के पक्ष में रैली कर के गए। हर तरफ इसी रैली की चर्चा है। पान पर कत्था लगाते दुकानदार ने कहा, ‘गए थे आज रैली में। पहले वाली बात नहीं थी। मोदी जी की रैली में लोग ही नहीं थे।’

बगल में बनी सीढ़ी पर बैठकर पान चबा रहे व्यक्ति ने पूछा, ‘घुसने दिया था? हम त एही लागी नहीं गए कि कहीं कोरोना की वजह से घुसने ही नहीं दिया तो दिन और मूड दोनों खराब हो जाएगा।’

दुकानदार ने जवाब दिया, ‘नहीं-नहीं। जाने दे रहा था। कौनो दिक्कत नहीं थी, लेकिन भीड़े नहीं आया। लोग बहुत कम था। शायद कोरोना की वजह से।’

पान के इंतजार में खड़े एक तीसरे आदमी ने तपाक से कहा, ‘काहे? कोरोना खाली मोदी जी की रैली में था क्या? तेजस्वी की रैली में तो तिल रखने की जगह नहीं रहती। एकदम रेलम-पेल मचा रहता है।’

इस जवाब पर वहां खड़े कई लोग सहमत दिखे, लेकिन मौन सहमति। वैसे भी मुंह में मगही पान घुल रहा हो तो सब जानते हैं कि फिर यहां का आदमी सुनता सबकी है, बोलता सिर्फ इशारों में है। वहां मौजूद ग्राहकों को पान खिला चुका दुकानदार अ‍ब इत्मीनान में आ चुका है। बोला, ‘तब हो सकता है कि ई तेजस्वी के ‘नौकरी बम’ का असर हो। जब हम रैली से निकल रहे थे, तब गांधी मैदान के पास चार-पांच गो लइकन सब आपसे में भिड़ल था। सब कह रहा था कि बेरोजगारी पर मोदी जी कुछो नहीं बोले। पुरनके बात सब बोल के चले गए।’

सड़क किनारे, स्ट्रीट लाइट की पीली और मद्धम रोशनी में चल रही इस बातचीत में एक नए गेस्ट की इंट्री हुई। पानी की बोतल खरीदने आए इस खद्दरधारी अधेड़ ने तपाक से कहा, ‘बकवास है ई सब। वो कहां से देंगे नौकरी? उनके माई-बाबू जी को पंद्रह साल बिहारी लोग माथे पर बिठाकर रखा। तब केतना नौकरी दे दिए थे? केतना बहाली हुआ था? ऊपर से स्थिति ऐसी थी कि अगर सांझ होते ही बहू-बेटी घर ना लौटे तो कंठ का थूक सुखने लगता था। तेजस्वी पहले थोड़ा अपने परिवार का इतिहास पढ़ लें, तब बात करें। आज कम से कम बिहार में वो स्थिति तो नहीं है।’

धारा-प्रवाह कही गई बात में जोश भी था, हनक भी। आवाज भी ऊंची थी। इतनी कि आसपास की दुकानों के लोग भी हुल्की मार रहे हैं। बिहार में होने वाली बहसों की ये खास बात है। आराम से होने वाली बातचीत कभी भी जोर पकड़ लेती है। कई बार तो इतना कि काबू करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, यहां अभी वैसी स्थिति नहीं है।

बिना पानी की नदी, बिना पेड़ के पहाड़ और खाने में तिलकुट के लिए फेमस गया जिले में विधानसभा की 10 सीटें हैं। इनमें से 6 ऐसी हैं, जिन पर एक ही व्यक्ति या एक ही परिवार का कब्जा लंबे अरसे से है।

पान की दुकान पर छिड़ी इस अंतहीन बहस को छोड़ मैं गांधी मैदान तक आ गया हूं। गेट नंबर 8 के सामने गन्ने का जूस बेचने वाले ठेले पर चार-पांच नए लड़के जमे हैं। ये दिन में मोदी जी को सुन चुके हैं और अब उसका विश्लेषण चल रहा है। एक ने कहा, ‘यार, अभी का सबसे बड़ा मुद्दा है बेरोजगारी। जब तेजस्वी ने कहा कि 10 लाख नौकरी देंगे तो सुशील मोदी ने कहा कि पैसा कहां से आएगा? अब खुदे कह रहे हैं कि 19 लाख रोजगार देंगे। हमारा त मन कर रहा है कि ई छोटका मोदी से पूछें, ‘का जी? अब आप पैसा कहां से लाइएगा। कहां डाका डालिएगा?’ साफ लग रहा है कि बहस का ये सिरा लंबा खिंचने वाला है। हम वहां से आगे बढ़ गए हैं।



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Tejashwi Yadav Narendra Modi; Bihar Election 2020 | Gaya Locals Paan Shop Debate On Tejashwi Yadav and Crowd In Narendra Modi Rally


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